“सीपीआर बचा सकती है हजारों की जान”

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Dr. Javed Parvez
(M.D., D.M. Cardiology, PDF Consultant Cardiologist, Cardiac Electrophysiologist)

Consultant Ramkrishna Care Hospital

कार्डियक अरेस्ट के कारण प्रतिवर्ष हजारों लोगों की जान चिकित्सा मिलने में विलम्ब के कारण चली जाती है। कार्डियक अरेस्ट कहीं भी, कभी भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में वहां पर मौजूद लोग यदि सीपीआर दे पाते हैं तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह कहना है रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के हृदयरोग विशेषज्ञ एवं हृदय की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ियों के विशेषज्ञ डॉ जावेद परवेज का।

प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लोगों की मौत एकाएक दिल का दौरा पड़ने के कारण हो जाती है। यह  एक ऐसी समस्या है जिसमें दिल एकाएक धड़कना बंद कर देता है और व्यक्ति की कुछ ही समय में मृत्यु हो जाती है। इनमें से 80 से 90 फीसदी मौतें अस्पताल से बाहर होती हैं। इनमें से 85 फीसदी लोगों को बायस्टैण्डर सीपीआर (वहां मौजूद लोगों द्वारा सीपीआर) नहीं मिल पाता।

डॉ परवेज ने कहा कि लोग आम तौर पर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक समझ लेते हैं। ऐसा नहीं है। हार्ट अटैक का मतलब हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में रुकावट आना जबकि इनमें से दूसरी स्थिति हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होती है। इसकी वजह से हृदय गति या तो तेज हो जाती है या फिर एकदम से रुक जाती है।

उन्होंने बताया कि एकाएक होने वाले कार्डियक अरेस्ट से पूर्व कुछ लक्षण इसका आभास दे देते हैं। इनमें सीने में तकलीफ, धड़कनों का तेज होना, बेहोश होना, सांस लेने में तकलीफ होना आदि शामिल हैं। ऐसा कोई भी उपसर्ग आने पर तत्काल किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए।

डॉ परवेज कहते हैं कि यदि आप किसी व्यक्ति को एकाएक चक्कर खाकर गिरते देखते हैं तो तत्काल उसकी मदद करें। यदि नब्ज न मिले और सांस भी रुकी हुई लगे तो तत्काल मेडिकल सहायता के लिए फोन कर दें और रोगी को सीपीआर देना प्रारंभ करें। इसे हम बाइस्टैण्डर सीपीआर कहते हैं। सही ढंग से देने पर सीपीआर रोगी के बचने की संभावना को 3 से 4 गुना बढ़ जाती है।

पारम्परिक सीपीआर का काम हृदय की धड़कनों को बाह्य दबाव के द्वारा पुनः चालू करना है। इसके साथ ही मुंह से मुंह लगाकर मरीज को सांस दी जा सकती है ताकि उसे ऑक्सीजन मिलता रहे। पर बाइस्टैण्डर सीपीआर में केवल सीने पर दबाव देना ही शामिल होता है।

सीपीआर देने की विधि

  1. मरीज के सीने के बाजू में घुटनों के बल बैठ जाएं।
  2. एक हाथ की गदेली को दूसरे हाथ की गदेली पर रखें और इसे मरीज के सीने के बीचों बीच रखें।
  3. अपने हाथों को सीधा कर लें ताकि कुहनियां पूरी खुल जाएं।
  4. मरीज के सीने पर पूरे शरीर का वजन डालते हुए सीधे दबाव डालें और फिर ढीला छोड़ें।
  5. एक मिनट में इस क्रिया को 100 बार दोहराने की कोशिश करें।

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