सरकार संक्रमण को कंट्रोल करने हेतु ‘चेज द वायरस’ रणनीति पर कर रही है काम

केंद्र सरकार की तीन-स्तरीय रणनीति ‘टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट’ की शुरुआत परीक्षण से होती है। केंद्र सरकार ‘चेज द वायरस’ (वायरस का पीछा) की नीति का उद्देश्य परीक्षण के माध्यम संक्रमण का प्रसार रोकने और हर शख्स की पहचान करना है। केंद्र सरकार की तीन-स्तरीय रणनीति ‘टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट’ की शुरुआत परीक्षण से होती है।  केंद्र सरकार ‘चेज द वायरस’ (वायरस का पीछा) की नीति का उद्देश्य परीक्षण के माध्यम संक्रमण का प्रसार रोकने और हर शख्स की पहचान करना है। केंद्र सरकार द्वारा परीक्षण की सुविधा को व्यापक बनाने और देश भर में आसान तथा अधिक सुलभ परीक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उच्च परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए सशक्त बनाया गया है। यह संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए संपर्कों की पहचान करने की त्वरित निगरानी और ट्रैकिंग में सहायक है।

उचित हो रही है कोरोना मरीजों की देखभाल
केंद्र सरकार ने घरों/आइसोलेशन केंद्र और अस्पतालों में रहने वाले रोगियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के लिए मानक प्रोटोकॉल जारी किए हैं। इनमें वैश्विक और राष्ट्रीय हालातों को देखते हुए समय- समय पर बदलाव किया जाता है। केंद्र सरकार तकनीकी, वित्तीय, सामग्री और अन्य संसाधनों के माध्यम से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में मदद कर रही है।

तेजी से ठीक हो रहे हैं कोरोना मरीज
प्रत्येक दिन बड़ी संख्या में ठीक होने वाले कोविड रोगियों के साथ ही भारत में तेजी से ठीक होने वाले रोगियों की संख्या में बढोत्तरी का सिलसिला जारी है।पिछले चौबीस घंटे के दौरान देश में 93,420 नए रोगी ठीक हुए हैं और इसके साथ ही ठीक होने वाले रोगियों की कुल संख्या 48,49,584 पहुंच गई है।ठीक होने की दैनिक वृद्धि के साथ साथ रिकवरी दर में भी लगातार सुधार हो रहा है। वर्तमान में यह  82.14% पर पहुंच गई है।

भारत ने इस तरह एक दिन में ठीक होने वाले सर्वाधिक रोगियों के साथ ही वैश्विक रैंकिग में ठीक होने वाले कुल रोगियों की संख्या में शीर्ष स्थान बनाया हुआ है।जैसे- जैसे भारत नए मामलों की तुलना में उससे अधिक रिकवरी दर हासिल कर रहा है वैसे- वैसे ठीक होने वाले मामलों और सक्रिय मामलों के बीच अंतर भी लगातार बढ़ रहा हैसक्रिय मामलों की तुलना में ठीक होने वाले मामलों की संख्या 5 गुना अधिक हो गई है।

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