महीनों लंबा खिंच सकतें है कोरोना वायरस के लक्षण

कोरोना संक्रमण से उबर चुके रोगियों में इसके लक्षण कई महीनों तक दिखाई दे सकते हैं। पहले जहां इसके इलाज के लिए फ्लू के इलाज के प्रमाणित मॉडल को स्वीकार किया गया था वहीं अब यह बात सामने आ चुकी है कि यह वायरस कुछ अलग तरह से काम कर रहा है। ब्रिस्टल (यूके) के साउथमीड हॉस्पिटल द्वारा 20 अगस्त को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण से उबर चुके लोगों में से दो तिहाई लोगों में इसके लक्षण तीन महीना या उससे भी अधिक समय तक बने रह सकते हैं। अब भारतीय मरीजों पर भी इस तरह का सर्वे किया जा रहा है।

हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल की कोविड टीम के अनुसार पहले जहां फोकस इस बात पर रहता था कि मरीज को किसी भी तरह से ठीक करके घर भेजना है वहीं अब इस पर भी गौर किया जा रहा है कि मरीज पूरी तरह से पूर्व स्थिति में कितने समय बाद लौटता है। मरीज 10-12 दिनों में ठीक होकर घर तो लौट जाता है पर उसे पूर्वावस्था में लौटने में महीनों लग जाते हैं। उनमें लक्षण बने रहते हैं। इन लक्षणों में थकान, सांस फूलना, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, दिमाग में धुंध छाना, याददाश्त का कमजोर पड़ना, डिप्रेशन, स्वाद या खुशबू नहीं आना आदि शामिल हैं।

स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक कोविड को मात देने वाले तीन चौथाई मरीज अपने रुटीन लाइफ में नहीं लौट पा रहे हैं। ब्रिटेन में किए गए इस शोध के मुताबिक अब भी 60 हजार लोग इस रोग के विभिन्न लक्षणों के साथ जी रहे हैं।

नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने इसे लौंग कोविड डिसीज का नाम दिया है। एनएचएस ने इसके लिए ब्रिटेन में 69 पुनर्वास क्लीनिकों की स्थापना की है। एनएचएस द्वारा जारी गाइडलाइन्स के अनुसार कोविड से रिकवर कर चुके मरीजों की एक माह बाद लौंग कोविड के लिए दोबारा जांच करनी चाहिए। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि कोविड के मरीज दो सप्ताल में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

किंग्स कालेज के कोविड सिम्पटम्स ऐप के मुताबिक 20 में से एक व्यक्ति में कोविड के लक्षण लंबे समय तक दिखाई देते हैं। वहीं एनएचएस वेल्स तथा एनएचएस स्कॉटलैंड के हेल्थ ऐप के मुताबिक यह संख्या 10 में से एक हो सकती है।

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