डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर ये आंखें हैं अनमोल…

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विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर कल डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग में टेलीमेडिसिन के जरिये राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़कर नेत्रों की सुरक्षा, नेत्र सम्बन्धी बीमारियों एवं उनके उपचार के सम्बन्ध में लोगों को जानकारी दी जाएगी। आयोजन की जानकारी देते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विभागाध्यक्ष नेत्र रोग विभाग प्रो. डॉ. एम. एल. गर्ग ने बताया कि हर साल अक्टूबर महीने के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है जिसे मनाने का उदेश्य आमजनों में दृष्टि या नेत्र की महत्ता एवं उसकी सुरक्षा के संबंध में जागरूक करना है।

वैसे तो शरीर में नेत्र या आंख के साथ अन्य ज्ञानेन्द्रियां भी हैं किंतु नेत्र की महत्ता ज्यादा इसलिए भी है क्योंकि किसी वस्तु, व्यक्ति आदि को देख लेने भर से उस वस्तु, व्यक्ति की शारीरिक संरचना की 80 से 90 फीसदी जानकारी प्राप्त हो जाती है। जीभ का कार्य बोलने में सहायता करना और स्वाद की जानकारी देना, कान का कार्य सुनना, नाक का कार्य श्वांस लेना एवं सूंघ कर किसी वस्तु की सुगंध ज्ञात करना है। ये सभी ज्ञानेन्द्रियां केवल कुछ ही चीजों की जानकारी एवं अनुभव प्रदान करती हैं लेकिन नेत्र एकमात्र ऐसी इन्द्रिय है जो कई प्रकार से उपयोगी है। जैसे-  हर्ष या वेदना हो अर्थात् गम या खुशी हो तो आंख से दुख या खुशी के आंसू निकल पड़ते हैं। नेत्र प्रत्यक्षदर्शी भी होते हैं। किसी वस्तु की प्रकृति का एक बार अनुभव हो जाने पर बाद में उसे देखने भर से उसकी प्रकृति भर का अनुमान हो जाता है। उदाहरण के तौर पर जैसे आपके हाथ में पेन या किताब है तो देखने भर से उनकी आकार, रंग आदि की जानकारी मिल जाती है। इस लिहाज से आंखों को सुरक्षित रखना बहुत आवश्यक है क्योंकि आंखें हैं तो जहान हैं। मानव शरीर में आंखों का कोई मोल नहीं है, ये बेशकीमती हैं जिनकी वजह से हम इस खूबसूरत संसार को देख पाते हैं।

इतना ही नहीं, आंखों से शरीर के अन्य अंगों की बीमारी या उनके लक्षणों की जानकारी भी मिल जाती है। जैसे- यदि किसी व्यक्ति को पीलिया है तो उसकी आंखें पीली हो जाएंगी। दिमाग में सूजन है तो आंख की अंदरूनी भाग की जांच करने पर दिमाग के सूजन का पता चल जाता है।

आंखों की सुरक्षा के लिये आंखों में होने वाली बीमािरयों की जानकारी एव रोकथाम जरूरी है। उदाहरण के तौर पर आंखों की सामान्य बीमारियों में दृष्टि दोष, जिसको चश्मे से ठीक किया जाता है। मोतियाबिंद को ऑपरेशन करके ठीक किया जाता है। इसके अलावा आंखों में काला मोतिया (ग्लाकोमा) जिसमें ज्यादातर 40 साल के बाद आंख का दबाव बढ़ता है और आंख की आप्टिक नर्व सूख जाती है और नेत्र ज्योति धीरे-धीरे कम होने लगती है इसलिए 40 साल उम्र के बाद आंख का एक सामान्य परीक्षण करवाते रहना चाहिए।

आंखों में दृष्टि जाने का दूसरा कारण है आंखों में किसी भी प्रकार की छोटी-मोटी चोट लगे तो विशेषज्ञ को तुरंत दिखवाना चाहिए ताकि तत्काल उपचार हो जाए वर्ना आंखों का कार्निया एवं नेत्र के अन्य भाग भी प्रभावित हो सकते हैं और दृष्टि जाने का अंदेशा बना रहता है।

कभी-कभी आंख के अंदर का पानी (विट्रियस) में मटमैलापन, पतलापन और रक्त का रिसाव हो सकता है। इनका कारण शरीर की अन्य बीमरियां जैसे ब्लड प्रेशर, मधुमेह एवं चोट आदि होते हैं।
इनके साथ ही इन सभी चीजों से रेटिना भी प्रभावित होता है इसलिए समय रहते आंखों की जांच की जाये या परीक्षण किया जाए तो बीमारी का पता लग जाता है और इलाज संभव होता है और दृष्टि बरकरार रहती है।
बच्चों में भी नेत्र सम्बन्धी समस्या पायी जाती है जिसमें भेंगापन, सूखापन, मोतियाबिंद, काला मोतिया एवं नेत्र की जन्मजात बीमारियां शामिल हैं इसलिए आंखों में किसी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करवाना चाहिए। वर्ना बड़े होने पर इलाज कराने पर भी रौशनी नहीं आती।

ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करना, संतुलित आहार नहीं लेना, उचित जीवनशैली नहीं अपनाना, इनकी वजह से भी आंखों में सूखापन(ड्राई आई), आंखें लाल होना (रेड आई) और आंसू की थैली में अधिक उम्र में संक्रमण होने की आशंका होती है जो नासूर हो जाती है। इसके चलते आंखों में कोई बीमारी हो तो उचित इलाज होने पर भी ठीक होने में समस्या आती है इसलिए आंसू की थैली में कुछ बीमारी हो तो उसे समय पर ठीक करना जरूरी होता है।

उपरोक्त बातें विश्व दृष्टि दिवस पर जनजागरण हेतु समाचार पत्र, चल-चित्र माध्यम, रेडियो, गोष्ठी, पोस्टर, रैली प्रदर्शनी आदि के माध्यम से समझाई जाती हैं, ताकि नेत्रों की सुरक्षा हो सके और दृष्टि बनी रहे। वर्तमान कोरोना काल में ये सभी जनजागरूकता कार्यक्रम टेलीमेडिसीन से जुड़कर, सोशल मीडिया व डिजीटिल प्लेटफार्म में आयोजित किये जाएंगे। अधिकतर शासकीय अस्पतालों में जिला स्तर एवं मेडिकल कॉलेजों में आंख की प्रत्येक बीमारी का सुचारू रूप से एवं कारगर ढंग से उपचार उपलब्ध है।

आजकल आधुनिक उपकरण मशीन जैसे- स्लिट लैम्प, पेरीमिट्री, सोनोग्राफी, एंजियोग्राफी, ओसीटी, माइक्रोस्कोप, टोनोमीटर, लेजर, नेत्र प्रत्यारोपण और लेंस प्रत्यारोपण की सुविधाएं उपलब्ध हैं इसलिए जनसाधारण इन सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।

नेत्र की महत्ता प्रतिादित करते हुए ठीक ही कहा गया है:
बिन नयन परिभाषा रंगों की न हो,
प्रीत गढ़े चितवन जब-जब मिलना हो,
नेत्र-मित्र सत्य के, मिथ्या के विनाशी,
नेत्रों से ही प्रदर्शित हर्ष-वेदना हो,
-प्रो. डॉ. एम. एल. गर्ग, विभागाध्यक्ष नेत्र रोग विभाग

 

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